क्या कहा, जरा दुबारा कहना

काफी समय पूर्व की बात है पर दिमाग से निकलती नही है। हमारे एक अधिकारी पदोन्नत हो कर लखनऊ स्थान्तरित हुए। जिस शाखा में वह जा रहे थे, वहां कर्मचारी यूनियन के एक बड़े नेता पहले से ही थे और वह शाखा उन दबंग नेता जी के नाम से ही जानी जाती थी। अतः मैंने अधिकारी महोदय को बधाई दी और कहा कि आप नेताजी (नाम ) की शाखा में

चुनाव आयोग की सख्ती

चुनाव आयोग ने आज़म खान के प्रचार पर दोबारा 48 घण्टों की रोक लगा कर अपनी शक्ति का अहसास करा दिया है। आयोग की स्थिति पवनपुत्र हनुमान जी की जैसी ही है। हनुमान जी बहुत बलशाली थे परन्तु उन्हें उनकी शक्ति का अहसास कराना होता था। सीता जी को ढूढने लंका भेजने से पूर्व जामवंत ने हनुमानजी को याद दिलाया – “कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ

Young Professional Program

Application for 2020 World Bank selection process for Young Professional Program is open from June 14 – July 28, 2019. Please encourage your children, nieces, nephews to apply if they satisfy the criteria. Should be born on or after 1 October 1987. Visit young Professional Program Here… We all have family and friends that we need to encourage to apply for these amazing careers

इस बार नहीं दिख रही कोई लहर – संजय कुमार

लोकसभा चुनाव के अब तक चार चरण पूरे हो चुके हैं, लेकिन इनमें न तो मोदी लहर दिखी है और न ही मोदी–विरोधी लहर। ऐसी कई वजहें हैं, जो स्पष्ट करती हैं कि अब तक के चुनाव बिना किसी लहर के संपन्न हुए हैं। पहला सुबूत तो मतदान प्रतिशत में छिपा है। 2014 के संसदीय चुनावों से अगर तुलना करें, तो समान निर्वाचन क्षेत्रों में पहले तीन दौर में मध्यम

चुनावी ड्यूटी : डर कर भागिए नही

जब भी चुनाव आते हैं, चुनावी कामकाज , मतदान, मतगणना आदि के लिए ड्यूटियां लगाई जाती हैं ,फिर चाहे विधान सभा, लोकसभा या निकायों के ही क्यों न हों। निकायों और विधानसभाओं के चुनावों में प्रायः राज्य सरकार के कर्मचारी इस कार्य को निपटा लेते हैं। परन्तु लोकसभा के चुनावों में बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, शिक्षकों, चिकित्सकों व अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी इस कार्य में लगाया जाता है। कुछ

मैं भारत का मतदाता हूँ

पहले प्रकाशित किया गया – http://indiasamachar24.com/9066 कृशकाय श्रमी हूँ मैंबुभुक्षित अन्नदाता हूँपेट काट कर कर देताईमानदार करदाता हूँलोकतंत्र का प्रहरी हूँसंविधान बचाता हूँपर जरा बताओ नेताजीपांच साल में एक बार हीयाद क्यों मैं आता हूँमैं भारत का मतदाता हूँ… आगे पढ़ें… http://indiasamachar24.com/9066

सारस्वत सम्मान

आज एक बहुत बड़े साहित्यिक मंच को साझा करने का गौरव प्राप्त हुआ। अवसर था अंतराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त #विश्वमैत्रीमंच भारत एवम साहित्य साधिका समिति आगरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन 2019 का। कार्यक्रम में देश के अनेक हिस्सों से पधारे साहित्यकारों ने प्रतिभागिता की। मुझे विशिष्ट विभूतियों के सानिध्य में काव्य पाठ करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक रावत ने की।

सप्ताहांत

19 अप्रैल को श्री हनुमान जयन्ती थी। हनुमान जी बहुत बलशाली थे परन्तु उन्हें उनकी शक्ति का अहसास कराना होता था। सीता जी को ढूढने लंका भेजने से पूर्व जामवंत ने हनुमानजी को याद दिलाया – “कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥ राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥” हमारे सर्वोच्च न्यायालय को भी यदा कदा जामवंत का रूप धारण करके संवैधानिक संस्थाओं

अध्यक्ष और गृहणी

अध्यक्ष और गृहणी में एक बड़ी समानता है – गृहणी बड़ी तैयारी से भोजन तैयार करती है परन्तु उस को आखिर में या तो सारा बचा खुचा खाने को मिलेगा या कुछ भी नही मिलता, बेचारी भूखी रह जाती है। अध्यक्ष जी भी बड़ी तैयारी के साथ नोट्स बना कर लाते हैं, पर जब उनका बोलने का समय आता है तो संचालक/सूत्रधार महोदय अपने हाथ की घड़ी देखते हुए बड़ी