भ्रम

तक्ष आज बहुत खुश था । उसे फेसबुक पर शिला नाम की एक लड़की ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। तुरन्त उसने स्वीकार भी कर ली। धीरे धीरे दोनों एक दूसरे की पोस्ट लाइक करने लगे। कमेंट्स भी शुरू हो गए।

तक्ष का शिला की ओर झुकाव बढ़ता चला गया। वह जानबूझ कर फेसबुक पर रोमांटिक कविताएं और शायरियां डालने लगा। शिला भी दिलखोल कर उसकी लेखनी की तारीफ करती और प्रोत्साहित भी करती।तक्ष के अनुरोध पर दोनों इनबॉक्स और व्हाट्सअप में भी प्रवेश कर गए। शिला को भी साहित्य में रुचि थी, वह लिखती और तक्ष तारीफों के पुल बांधता। जवाब में शिला आभार जताना बिल्कुल नही भूलती। शनैः शनैः दोनों में फेसबुक और व्हाट्सअप पर नजदीकियां बढ़ती गई। शिला भी सुबह उठते ही गुड मॉरर्निंग व रात को सोने से पूर्व गुड नाइट संदेश देना नही भूलती। एक दूसरे की पसन्द- नापसन्द की जानकारी, पुराने अनुभव भी साझा होने लगे।

तक्ष की जिद करने पर शिला ने एक दिन अपना नया फोटो भी साझा कर दिया, किसी शादी के कार्यक्रम का था, बहुत सुंदर लग रही थी। तक्ष को लगा कि शिला अब पूरी तरह उसकी ओर आकर्षित हो गई है और अब शिला से अपने मन की बात कही जा सकती है, उसने शिला के फोटो पर दिल और चुम्बन के निशान (इमोजी) पेस्ट करके उसे फारवर्ड कर दिया।

शिला का कुछ दिनों तक कोई जवाब नही आया, न कोई गुडमार्निंग न गुड नाइट संदेश। तक्ष लगातार उसे मेसेज करता रहा। उसने पूछा क्या हुआ शिला, बीमार हो क्या?

तक्ष को व्हाट्सएप पर शिला का मैसेज मिला “नही तक्ष! बीमार मैं नही आप हो”! मानसिक रूप से बीमार हो।

मैंने आपका प्रोफाइल देखा था। आपकी साहित्यिक रचनाओं ने मुझे प्रभावित किया। आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, आपका मित्रमंडल अच्छा लगा, आप विवाहित हैं और प्रतिभाशाली पुत्र- पुत्री के पिता हैं। मुझे लगा आप से जुड़ कर मैं भी कुछ सीखूंगी।

मेरा भ्रम तो दूर हो गया, आप अपना भी दूर कर लीजिए मिस्टर तक्ष!

-सर्वज्ञ शेखर

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