पानी रे पानी – आगमन प्रथम पुरस्कार

पानी रे पानी,कितना बचा है आंखों में…

साहित्यिक सांस्कृतिक फेसबुक समूह आगमन एक खूबसूरत शुरूआत , द्वारा आयोजित साप्ताहिक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त रचना…

पानी रे पानी

पानी, दो अक्षरों का यह शब्द केवल एक शब्द ही नही वरन समस्त संसार की जीवन धारा है। केवल यह संशय सदैव रहता है कि पानी को ईश्वर के समकक्ष रखा जाए या उनसे भी ऊपर। परन्तु माना यही जाता है कि जल ईश्वर के प्राकट्य से पूर्व भी उपलब्ध था। इसके अतिरिक्त प्रकृति व प्राणी मात्र को जीवन प्रदान करने का ईश्वर के पास पानी ही सशक्त माध्यम है। अतः दोनों को एक दूसरे का पूरक भी कहा जा सकता है।

भारतीय ऋषि-मुनियों ने पानी को उसके मौलिक रूप में नारायण माना है। वह नर से उत्पन्न हुआ है इसलिये उसे नार कहा जाता है। सृष्टि के पूर्व वह अर्थात नार (जल) ही भगवान का अयन (निवास) था। नारायण का अर्थ है भगवान का निवास स्थान। पानी में आवास होने के कारण भगवान को नारायण कहते हैं। पानी अविनाशी, अनादि और अनन्त है। उसके बारे में कहा गया है –

आपो नारा इति प्रोक्ता, नारो वै नर सूनवः।
अयनं तस्य ताः पूर्व, ततो नारायणः स्मृतः।।

ऋग्वेद संहिता में तो जल को अमृत कहा गया है –

अप्सु अन्तः अमृतम् अप्सु भेषजम् अपाम् उत प्रशस्तये, देवाः भवत वाजिनः।

शब्दार्थः जल में अमृत है, जल में औषधि है । हे ऋत्विज्जनो, ऐसे श्रेष्ठ जल की प्रशंसा अर्थात् स्तुति करने में शीघ्रता बरतें।

रामचरित मानस में भी गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान राम के मुखारविंद से ज्ञानवर्धन कराते हुए कहा है…

क्षिति जल पावक गगन समीरा।
पंच रचित अति अधम शरीरा।।

जहां तक विज्ञान का संबंध है, पानी एक आम रासायनिक पदार्थ है जिसका अणु दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु से बना है – H2O। आमतौर पर जल शब्द का प्प्रयोग द्रव अवस्था के लिए उपयोग में लाया जाता है पर यह ठोस अवस्था (बर्फ) और गैसीय अवस्था (भाप या जल वाष्प) में भी पाया जाता है। पानी जल-आत्मीय सतहों पर तरल-क्रिस्टल के रूप में भी पाया जाता है।

पृथ्वी का लगभग 71% सतह को 1.460 पीटा टन (पीटी) (1021 किलोग्राम) जल से आच्छदित है जो अधिकतर महासागरों और अन्य बड़े जल निकायों का हिस्सा होता है इसके अतिरिक्त, 1.6% भूमिगत जल एक्वीफर और 0.001% जल वाष्प और बादल (इनका गठन हवा में जल के निलंबित ठोस और द्रव कणों से होता है) के रूप में पाया जाता है।

लेकिन पानी रे पानी, कितनी बचेगी तेरी निशानी। जिस प्रकार से पानी की बर्बादी हो रही है, यह लगने लगा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा। ऐसी स्थिति आने वाली है कि न बचेगा स्रोतों में और न लोगों की आंखों में पानी।

सर्वज्ञ शेखर

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