नववर्ष 2021: आओ नया संकल्प करें

नया साल 2021 आ गया है। नए वर्ष पर नया रेसोल्यूशन या संकल्प करने की भी एक प्रथा चली आ रही है। यह प्रथा अच्छी है । सभी को कोई भी एक बुराई छोड़ने और एक नया अच्छा काम शुरू करने का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प की प्रक्रिया में एक बात का ध्यान रखना आवश्यक है। संकल्प कठिन नहीं होना चाहिए। जो काम आप छोड़ना चाहते हैं वो ऐसा हो

सप्ताहांत: लोक संवाद में भाषा का गिरता स्तर

बिहार में आजकल विधानसभा चुनाव व कई राज्यों में उपचुनाव हो रहे हैं। चुनावी भाषणों में नेता मर्यादा की सीमा लाँघने में लगे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे अभद्र व असंसदीय भाषा बोलने की प्रतियोगिता चल रही हो। इस संबंध में एक पुराना छोटा प्रसंग याद आ रहा है – एक बार एक राजा अपने सेनापति और सिपाही के साथ शिकार करने जंगल में गए। लेकिन अंधेरा होने पर

क्या हिंदी दिवस मनाना एक विडम्बना है?

सर्वप्रथम आप सभी को हिंदी दिवस की बधाई! निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पँक्तियों के अनुरूप निज भाषा के प्रचार प्रसार व संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हमारा देश हिंदी दिवस का आयोजन करता

सप्ताहांत: मेरे गुरु जी

जिस समय मैं यह पंक्तियाँ लिख रहा हूँ, आज शिक्षक दिवस है। तथापि इस आलेख के प्रकाशित होने तक शिक्षक दिवस निकल चुका होगा। मैं इस पुनीत अवसर पर अपने प्राइमरी शिक्षक जिन्होंने सबसे पहले मेरे को एक प्राइमरी विद्यालय में शिक्षा दी, वह छोटे से विद्यालय के प्रधानाचार्य थे, आदरणीय चंदन लाल गुप्ता जी को याद करना चाहता हूँ। उन्होंने ही मेरे जीवन की शैक्षिक आधारशिला रखी जो कि

कभी कभी ऐसा भी हो जाता है

एक बड़े बाबा देश के एक नामी चैनल पर आज सुबह डायबिटीज कम करने का लाइव सेशन चला रहे थे और दावा कर रहे थे कि आधे घंटे में डायबिटीज कम हो जाएगी। इसके लिए उन्होंने पहले अपनी और अपने 2 शिष्यों की डायबिटीज चेक की। उनकी 96 उनकी शिष्या की 178 व शिष्य की 297 रही। आधा घंटे के योग कार्यक्रम के बाद जब डायबिटीज चेक की गई तो

सप्ताहांत: ऑनलाइन शिक्षा व बच्चों में संस्कारों का हनन

कोरोना, भारत-चीन सीमा विवाद, विकास दुबे और राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के बीच हम एक ऐसे विषय को भूल गए जो इस समय बहुत प्रासंगिक है। वह है बच्चों में नीति व सांस्कृतिक संस्कारों का पोषण। लॉक डाउन की वजह से व बाद में अनलॉक डाउन के समय में भी छोटे बच्चों को एवं बड़े विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा का जितना लाभ है

सप्ताहांत: योग, गौरव और नमन का दिन

यह सप्ताह बहुत गहमागहमी भरा और अनेक घटनाओं से परिपूर्ण रहा। सप्ताह के प्रारंभ में फिल्म अभिनेता सुशांत की विषम परिस्थितियों में आत्महत्या, फिर भारत चीन सीमा विवाद में हमारे बीस वीर जवानों की शहादत इस सप्ताह की प्रमुख घटनाएँ रहे ।इसके अतिरिक्त आज रविवार को योग दिवस, मित्र दिवस व इस साल का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण दिवस है। इस प्रकार यह सप्ताह दुख, शोक, गौरव, नमन, हवन पूजन

लघुकथा गोष्ठी

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका संस्थान संगम के तत्वावधान में एक लघु कथा ऑडियो गोष्ठी का आयोजन किया गया ।गोष्ठी की अध्यक्षता की तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल के अध्यक्ष डॉ मोहन तिवारी आनंद ने, व मुख्य अतिथि बेंगलुरु की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ उषा श्रीवास्तव थी। गोष्ठी के प्रारंभ में सरस्वती वंदना की वरिष्ठ कवयित्री डॉ शशि तिवारी ने। संस्था का परिचय वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजेंद्र मिलन ने दिया एवं सभी का

सप्ताहांत: यह पलायन नहीं है

घटना काफी पुरानी है। एक कार्यक्रम का संचालन करते समय एक अतिथि का जीवन परिचय बताते हुए मैंने कुछ ऐसा बताया कि शिक्षा पूरी करने के उपराँत वह दूसरे प्रदेश में पलायन कर गए। अतिथि महोदय थोड़ी देर में संयोजक को बता कर कार्यक्रम बीच में छोड़ कर चले गए। बाद में मुझे बताया गया कि मेरे द्वारा उनके परिचय में पलायन की बात कहने से वह नाराज थे। पलायन

सप्ताहांत: आओ! हम बनाएं, सकारात्मक वातावरण

लॉकडाउन में घरों में बंद रहने के कारण और कोरोना से संबंधित दुःखद खबरें देख-पढ़ कर ज्यादातर लोग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसी दशा में कुछ लोग आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं और अपने पूरे परिवार को तबाह कर लेते हैं। यह सब सकारात्मक वातावरण के अभाव में हो रहा है। यदि हम सकारात्मक वातावरण में रहें और सकारात्मक वातावरण न होने