आप को कोरोना कैसे हुआ हे महामानव

आम जनता से लोगों को बहुत शिकायत रहती है कि कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं, बाजारों में ऐसे ही घूम रहे हैं, साबुन से हाथ नहीं धो रहे हैं, सामान को सैनिटाइजर नहीं कर रहे हैं, आदि आदि। लेकिन जब उन लोगों को कोरोना होता है जो अभेद्य सुरक्षा चक्र में रहते हैं,

सप्ताहांत: योग, गौरव और नमन का दिन

यह सप्ताह बहुत गहमागहमी भरा और अनेक घटनाओं से परिपूर्ण रहा। सप्ताह के प्रारंभ में फिल्म अभिनेता सुशांत की विषम परिस्थितियों में आत्महत्या, फिर भारत चीन सीमा विवाद में हमारे बीस वीर जवानों की शहादत इस सप्ताह की प्रमुख घटनाएँ रहे ।इसके अतिरिक्त आज रविवार को योग दिवस, मित्र दिवस व इस साल का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण दिवस है। इस प्रकार यह सप्ताह दुख, शोक, गौरव, नमन, हवन पूजन

सप्ताहांत: नज़रिया अपना-अपना

बात है तो बहुत पुरानी, सन 1981 में, मैंने अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ माता वैष्णो देवी और जम्मू कश्मीर की यात्रा की। जब हम जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे तो अचानक रास्ते में बहुत काली घटा छाई, बारिश होने लगी, बिजली कड़कने लगी और दिन में अंधेरा छा गया। हम लोग बहुत डर गए, और बेटा बहुत छोटा था, सर्दी के कारण उसकी भी नाक नीली

सप्ताहांत: कोरोना के साथ जीना सीखना है मरना नहीं

1 जून से अनलॉक-1 शुरू होने के साथ ही ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोरोना भी अनलॉक हो गया हो। शुक्रवार 05 जून को इन पंक्तियों के लिखने के पिछले 24 घण्टों में देश में कोरोना के मामलों में जबरदस्त उछाल आया है। विगत 24 घंटे में 9 हजार 851 नए मामलों की पुष्टि हुई और 273 लोगों की मौत हुई है।अब देश में कुल मरीजों की संख्या 2

सप्ताहांत: तेरा दुख और मेरा दुख

अभी कुछ दिनों पूर्व एक पत्रकार साथी का कोरोना बीमारी के कारण दुःखद निधन हो गया था। मैंने उनको श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट डाली थी कि “आज मैं बहुत दुखी हूं।” मेरी पोस्ट को पढ़कर मेंरे एक साथी फोन आया कि कोरोना से सैकड़ों लोग रोज मर रहे हैं, आपने कभी दुख व्यक्त नहीं किया पर आज आप ज्यादा दुखी क्यों हैं? यह एक ऐसा सवाल था

सप्ताहांत: यह पलायन नहीं है

घटना काफी पुरानी है। एक कार्यक्रम का संचालन करते समय एक अतिथि का जीवन परिचय बताते हुए मैंने कुछ ऐसा बताया कि शिक्षा पूरी करने के उपराँत वह दूसरे प्रदेश में पलायन कर गए। अतिथि महोदय थोड़ी देर में संयोजक को बता कर कार्यक्रम बीच में छोड़ कर चले गए। बाद में मुझे बताया गया कि मेरे द्वारा उनके परिचय में पलायन की बात कहने से वह नाराज थे। पलायन

समझिए लोकल का मतलब ग्लोकल के साथ

12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश को 20 लाख करोड़ के पैकेज के अलावा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रखा। उन्होंने लोकल सामान का उत्पादन करने, खरीदने और उसके प्रसार के लिए वोकल अर्थात मुखर रहने की अपील की। बड़ी सावधानी के साथ अपने पूरे भाषण में उन्होंने ‘स्वदेशी’ शब्द का प्रयोग ही नहीं किया। चाहते तो वह भी लोकल की बजाय स्वदेशी कह सकते थे।

सप्ताहांत: आओ! हम बनाएं, सकारात्मक वातावरण

लॉकडाउन में घरों में बंद रहने के कारण और कोरोना से संबंधित दुःखद खबरें देख-पढ़ कर ज्यादातर लोग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसी दशा में कुछ लोग आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं और अपने पूरे परिवार को तबाह कर लेते हैं। यह सब सकारात्मक वातावरण के अभाव में हो रहा है। यदि हम सकारात्मक वातावरण में रहें और सकारात्मक वातावरण न होने

संस्थान संगम की ऑनलाइन काव्यगोष्ठी

कोरोना के योद्धाओं को नमन, अभिनंदन,मजदूरों की दशा पर चिंता आगरा। साहित्यिक संस्था संस्थान संगम के तत्वावधान में ऑनलाइन ऑडियो कविगोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने की। मुख्य अतिथि थे दिल्ली के कर्नल प्रवीण त्रिपाठी। गोष्ठी में अमेरिका से डॉ शशि गुप्ता सहित बैंगलोर, कोटा, ग्वालियर, दिल्ली, मेरठ, भोपाल, आगरा के 50 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। गोष्ठी का

सप्ताहांत: बहुत फायदे है खुद काम करने के

“हाय राम! जरा देखना कितना कूड़ा है दीवान के नीचे, बाई को कितनी बार बोला है जरा झाडू से अंदर तक सफाई किया कर, पर सुनती ही नहीं है। इधर उधर दो चार हाथ मारे, बस हो गया काम। धीरे-धीरे ही सही, आज खुद मैं ही कर लेती हूँ पूरे घर की सफाई।” लॉकडाउन के दौरान जब बाई को छुट्टी दे दी, यह उस दिन का वाकया है। और अब