कोविड से भी ज्यादा भीषण वायु प्रदूषण

हमारे देश में बढ़ते हुए वायु प्रदूषण व उसके दुष्प्रभाव ने एक बार फिर चिंतित कर दिया है। एक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट (लैंसेट प्लेटनरी हेल्थ रिपोर्ट) ने खुलासा किया है कि सिर्फ वायु प्रदूषण से वर्ष 2019 में 16.7 लाख भारतीयों की मौत हो चुकी है। यह कुल मौतों का 18 फीसदी है। हालांकि सरकारें प्रदूषण से लड़ने के लिए तमाम तरह की योजनाओं और कार्यक्रमों की बातें कहती

सप्ताहांत: सतर्कता ही एकमात्र रास्ता है

कोरोना के विरुद्ध युद्व अभी जारी है। देश में अब बहुत कुछ अनलॉक हो चुका है। कुछ अपवादों को छोड़कर लॉकडाउन का भारत की जनता ने समझदारी से व दृढ़ता से पालन किया। इसी लिए हमारे देश में अन्य देशों की अपेक्षा इस महामारी का प्रसार कम हो पाया। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कुल मरीज़ों की संख्या 3461240 थी। कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 62173 है।

सप्ताहांत: ऑनलाइन शिक्षा व बच्चों में संस्कारों का हनन

कोरोना, भारत-चीन सीमा विवाद, विकास दुबे और राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के बीच हम एक ऐसे विषय को भूल गए जो इस समय बहुत प्रासंगिक है। वह है बच्चों में नीति व सांस्कृतिक संस्कारों का पोषण। लॉक डाउन की वजह से व बाद में अनलॉक डाउन के समय में भी छोटे बच्चों को एवं बड़े विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा का जितना लाभ है

आप को कोरोना कैसे हुआ हे महामानव

आम जनता से लोगों को बहुत शिकायत रहती है कि कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं, बाजारों में ऐसे ही घूम रहे हैं, साबुन से हाथ नहीं धो रहे हैं, सामान को सैनिटाइजर नहीं कर रहे हैं, आदि आदि। लेकिन जब उन लोगों को कोरोना होता है जो अभेद्य सुरक्षा चक्र में रहते हैं,

सप्ताहांत: योग, गौरव और नमन का दिन

यह सप्ताह बहुत गहमागहमी भरा और अनेक घटनाओं से परिपूर्ण रहा। सप्ताह के प्रारंभ में फिल्म अभिनेता सुशांत की विषम परिस्थितियों में आत्महत्या, फिर भारत चीन सीमा विवाद में हमारे बीस वीर जवानों की शहादत इस सप्ताह की प्रमुख घटनाएँ रहे ।इसके अतिरिक्त आज रविवार को योग दिवस, मित्र दिवस व इस साल का पहला और आखिरी सूर्यग्रहण दिवस है। इस प्रकार यह सप्ताह दुख, शोक, गौरव, नमन, हवन पूजन

सप्ताहांत: नज़रिया अपना-अपना

बात है तो बहुत पुरानी, सन 1981 में, मैंने अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ माता वैष्णो देवी और जम्मू कश्मीर की यात्रा की। जब हम जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे तो अचानक रास्ते में बहुत काली घटा छाई, बारिश होने लगी, बिजली कड़कने लगी और दिन में अंधेरा छा गया। हम लोग बहुत डर गए, और बेटा बहुत छोटा था, सर्दी के कारण उसकी भी नाक नीली

सप्ताहांत: कोरोना के साथ जीना सीखना है मरना नहीं

1 जून से अनलॉक-1 शुरू होने के साथ ही ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोरोना भी अनलॉक हो गया हो। शुक्रवार 05 जून को इन पंक्तियों के लिखने के पिछले 24 घण्टों में देश में कोरोना के मामलों में जबरदस्त उछाल आया है। विगत 24 घंटे में 9 हजार 851 नए मामलों की पुष्टि हुई और 273 लोगों की मौत हुई है।अब देश में कुल मरीजों की संख्या 2

सप्ताहांत: तेरा दुख और मेरा दुख

अभी कुछ दिनों पूर्व एक पत्रकार साथी का कोरोना बीमारी के कारण दुःखद निधन हो गया था। मैंने उनको श्रद्धांजलि देते हुए फेसबुक पर एक पोस्ट डाली थी कि “आज मैं बहुत दुखी हूं।” मेरी पोस्ट को पढ़कर मेंरे एक साथी फोन आया कि कोरोना से सैकड़ों लोग रोज मर रहे हैं, आपने कभी दुख व्यक्त नहीं किया पर आज आप ज्यादा दुखी क्यों हैं? यह एक ऐसा सवाल था

सप्ताहांत: यह पलायन नहीं है

घटना काफी पुरानी है। एक कार्यक्रम का संचालन करते समय एक अतिथि का जीवन परिचय बताते हुए मैंने कुछ ऐसा बताया कि शिक्षा पूरी करने के उपराँत वह दूसरे प्रदेश में पलायन कर गए। अतिथि महोदय थोड़ी देर में संयोजक को बता कर कार्यक्रम बीच में छोड़ कर चले गए। बाद में मुझे बताया गया कि मेरे द्वारा उनके परिचय में पलायन की बात कहने से वह नाराज थे। पलायन

समझिए लोकल का मतलब ग्लोकल के साथ

12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश को 20 लाख करोड़ के पैकेज के अलावा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रखा। उन्होंने लोकल सामान का उत्पादन करने, खरीदने और उसके प्रसार के लिए वोकल अर्थात मुखर रहने की अपील की। बड़ी सावधानी के साथ अपने पूरे भाषण में उन्होंने ‘स्वदेशी’ शब्द का प्रयोग ही नहीं किया। चाहते तो वह भी लोकल की बजाय स्वदेशी कह सकते थे।