सप्ताहांत: आओ! हम बनाएं, सकारात्मक वातावरण

लॉकडाउन में घरों में बंद रहने के कारण और कोरोना से संबंधित दुःखद खबरें देख-पढ़ कर ज्यादातर लोग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसी दशा में कुछ लोग आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं और अपने पूरे परिवार को तबाह कर लेते हैं। यह सब सकारात्मक वातावरण के अभाव में हो रहा है। यदि हम सकारात्मक वातावरण में रहें और सकारात्मक वातावरण न होने

क्या कहा, जरा दुबारा कहना

काफी समय पूर्व की बात है पर दिमाग से निकलती नही है। हमारे एक अधिकारी पदोन्नत हो कर लखनऊ स्थान्तरित हुए। जिस शाखा में वह जा रहे थे, वहां कर्मचारी यूनियन के एक बड़े नेता पहले से ही थे और वह शाखा उन दबंग नेता जी के नाम से ही जानी जाती थी। अतः मैंने अधिकारी महोदय को बधाई दी और कहा कि आप नेताजी (नाम ) की शाखा में

अध्यक्ष और गृहणी

अध्यक्ष और गृहणी में एक बड़ी समानता है – गृहणी बड़ी तैयारी से भोजन तैयार करती है परन्तु उस को आखिर में या तो सारा बचा खुचा खाने को मिलेगा या कुछ भी नही मिलता, बेचारी भूखी रह जाती है। अध्यक्ष जी भी बड़ी तैयारी के साथ नोट्स बना कर लाते हैं, पर जब उनका बोलने का समय आता है तो संचालक/सूत्रधार महोदय अपने हाथ की घड़ी देखते हुए बड़ी