नववर्ष तुम आ तो गए हो

नव वर्ष तुम आ तो गए होक्या क्या नया लाए हो संग,क्या बदलोगे दशा देश कीदे नई खुशियाँ और उमँग। बदलेगा पञ्चाङ्ग कलेंडरदिनांक आएगा बस नया,नया नहीं हुआ कुछ भी तोफिर कैसे नव वर्ष हो गया। चंदा सूरज वही रहेंगेतारों में होगी वो ही टिमटिम,वही सुहाना मौसम होगाऔर होगी वारिश रिमझिम। पतझड़ होगा फूल खिलेंगेपुष्पित पल्लवित चमन रहेंगे,मधुमास की मादक मस्तीझूम-झूम भँवरे झूमेंगे। उसी दिशा में प्रवाहित होगीकलकल निनादिनी की

क्या हिंदी दिवस मनाना एक विडम्बना है?

सर्वप्रथम आप सभी को हिंदी दिवस की बधाई! निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पँक्तियों के अनुरूप निज भाषा के प्रचार प्रसार व संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हमारा देश हिंदी दिवस का आयोजन करता

सप्ताहांत: ऑनलाइन शिक्षा व बच्चों में संस्कारों का हनन

कोरोना, भारत-चीन सीमा विवाद, विकास दुबे और राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के बीच हम एक ऐसे विषय को भूल गए जो इस समय बहुत प्रासंगिक है। वह है बच्चों में नीति व सांस्कृतिक संस्कारों का पोषण। लॉक डाउन की वजह से व बाद में अनलॉक डाउन के समय में भी छोटे बच्चों को एवं बड़े विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा का जितना लाभ है

हम और आप मिलेंगे 7 बजे आज की शाम

मित्रो, नमस्कार।इस लिंक पर क्लिक कीजिए… https://www.facebook.com/groups/614507565818639/ और आज शाम 7 बजे अवश्य जुड़िये मुझ से।आपका स्वागत है। मैं प्रतीक्षा करूंगा।

लघुकथा गोष्ठी

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका संस्थान संगम के तत्वावधान में एक लघु कथा ऑडियो गोष्ठी का आयोजन किया गया ।गोष्ठी की अध्यक्षता की तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल के अध्यक्ष डॉ मोहन तिवारी आनंद ने, व मुख्य अतिथि बेंगलुरु की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ उषा श्रीवास्तव थी। गोष्ठी के प्रारंभ में सरस्वती वंदना की वरिष्ठ कवयित्री डॉ शशि तिवारी ने। संस्था का परिचय वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजेंद्र मिलन ने दिया एवं सभी का

सप्ताहांत: आओ! हम बनाएं, सकारात्मक वातावरण

लॉकडाउन में घरों में बंद रहने के कारण और कोरोना से संबंधित दुःखद खबरें देख-पढ़ कर ज्यादातर लोग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसी दशा में कुछ लोग आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं और अपने पूरे परिवार को तबाह कर लेते हैं। यह सब सकारात्मक वातावरण के अभाव में हो रहा है। यदि हम सकारात्मक वातावरण में रहें और सकारात्मक वातावरण न होने

हरि बोल, हरि, हरि हरि बोल

नारी शक्ति का पूज्य उपासकबेटियों का है रखता मान।नदियों को भी माँ मानतादेवियों का करता गुणगान।।माँ भारती को नमन करताराष्ट्रभाषा का करता सम्मान।हिंदी बिंदी भारत माँ कीऐसी संस्कृति का देता ज्ञान।।वीर शहीदों के रक्त से सिंचितआजादी का पुष्पित उद्यान।राष्ट्रवीरों को नमन करतामेरा प्यारा हिंदुस्तान।।सीमा पर खड़े हैं सैनिकबहादुरी से सीना खोल,हरि बोल, हरि, हरि हरि बोल। राष्ट्रद्रोही कुछ सक्रिय हो रहेरहना उनसे सावधान।संस्कृति, धर्म की रक्षा करनाहो अपना कर्तव्य महान।।व्यभिचारी,

संस्थान संगम की ऑनलाइन काव्यगोष्ठी

कोरोना के योद्धाओं को नमन, अभिनंदन,मजदूरों की दशा पर चिंता आगरा। साहित्यिक संस्था संस्थान संगम के तत्वावधान में ऑनलाइन ऑडियो कविगोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने की। मुख्य अतिथि थे दिल्ली के कर्नल प्रवीण त्रिपाठी। गोष्ठी में अमेरिका से डॉ शशि गुप्ता सहित बैंगलोर, कोटा, ग्वालियर, दिल्ली, मेरठ, भोपाल, आगरा के 50 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। गोष्ठी का

पढ़ने की आदत डालें

विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष पिछली दीवाली की बात है।फेसबुक पर किसी ने एक संदेश पोस्ट किया कि उनके परिवार में किसी का निधन हो जाने के कारण इस बार वह दीपावली नहीं मनाएंगे। उनके कुछ मित्रों ने इसे भी दीपावली का सामान्य संदेश समझा और अपनी ओर से बधाई व शुभकामनाएँ प्रेषित कर दीं। पहले पक्ष ने इस बात का बुरा नहीं माना क्योंकि वह समझ गए कि मूल