भूल न जाना होली की ठिठोली में

रंगों की उड़ेगी बौछारघूमेंगे हुरियारी टोली मेंअबीर गुलाल की होगी बहारहोली की मस्त ठिठोली मेंभीगेंगे पानी में हमसबरंग बरसेगा चोली में गले मिलना शिकवे मिटानाभूल न जानाहोली की ठिठोली में खूनी होली खेल रहेआतंकी पड़ोस से आ केशहीद हो रहे सपूत भारत माँ केछाती पर गोली खा केतोप चलाओ मिसाइल दागोकुछ नहीं रखा वार्ता बोली में लेना है भीषण बदला उनसेभूल न जानाहोली की ठिठोली में जो भी दीखे लाचारगरीब

रंगों में सब से पावन रंग तिरंगा

रंगों का त्योहार है होली, अजब- गजब हैं इसके रंग,हर रंग की है अलग कहानी, सुनो आज आप मेरे संग । धूमधाम से पर्व मनाओ, लगाओ रंग नीला पीला लाल,मस्तक पर हो चंदन सुरभित, रंगों से सजे हों गाल। श्वेत रंग है प्रतीक शांति का, इस रंग से सब रंग जाओ,गले मिलो प्रेम प्यार से, झगड़े पुराने भूल जाओ। लाल रंग है जोश प्रेम का, पीले से मिलती नव ऊर्जा,नारंगी

सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा यादव को पद्मश्री

आगरा की गौरव, सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. उषा यादव को पद्मश्री अवार्ड के लिए चयन होने पर आज संस्थान संगम पत्रिका की ओर से उनका अभिनंदन किया गया। पत्रिका की समन्वयक डॉ शशि गोयल, संपादक डॉ अशोक अश्रु, कार्यकारी संपादक सर्वज्ञ शेखर ने डॉ उषा यादव के आवास पर उनको पुष्पगुच्छ, मणि माला व अंगवस्त्र से सम्मानित किया।डॉ यादव ने संस्थान संगम परिवार के प्रति आभार प्रकट किया व धन्यवाद स्वरूप

नववर्ष तुम आ तो गए हो

नव वर्ष तुम आ तो गए होक्या क्या नया लाए हो संग,क्या बदलोगे दशा देश कीदे नई खुशियाँ और उमँग। बदलेगा पञ्चाङ्ग कलेंडरदिनांक आएगा बस नया,नया नहीं हुआ कुछ भी तोफिर कैसे नव वर्ष हो गया। चंदा सूरज वही रहेंगेतारों में होगी वो ही टिमटिम,वही सुहाना मौसम होगाऔर होगी वारिश रिमझिम। पतझड़ होगा फूल खिलेंगेपुष्पित पल्लवित चमन रहेंगे,मधुमास की मादक मस्तीझूम-झूम भँवरे झूमेंगे। उसी दिशा में प्रवाहित होगीकलकल निनादिनी की

क्या हिंदी दिवस मनाना एक विडम्बना है?

सर्वप्रथम आप सभी को हिंदी दिवस की बधाई! निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पँक्तियों के अनुरूप निज भाषा के प्रचार प्रसार व संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हमारा देश हिंदी दिवस का आयोजन करता

सप्ताहांत: ऑनलाइन शिक्षा व बच्चों में संस्कारों का हनन

कोरोना, भारत-चीन सीमा विवाद, विकास दुबे और राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के बीच हम एक ऐसे विषय को भूल गए जो इस समय बहुत प्रासंगिक है। वह है बच्चों में नीति व सांस्कृतिक संस्कारों का पोषण। लॉक डाउन की वजह से व बाद में अनलॉक डाउन के समय में भी छोटे बच्चों को एवं बड़े विद्यार्थियों को भी ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा का जितना लाभ है

हम और आप मिलेंगे 7 बजे आज की शाम

मित्रो, नमस्कार।इस लिंक पर क्लिक कीजिए… https://www.facebook.com/groups/614507565818639/ और आज शाम 7 बजे अवश्य जुड़िये मुझ से।आपका स्वागत है। मैं प्रतीक्षा करूंगा।

लघुकथा गोष्ठी

साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रिका संस्थान संगम के तत्वावधान में एक लघु कथा ऑडियो गोष्ठी का आयोजन किया गया ।गोष्ठी की अध्यक्षता की तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल के अध्यक्ष डॉ मोहन तिवारी आनंद ने, व मुख्य अतिथि बेंगलुरु की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ उषा श्रीवास्तव थी। गोष्ठी के प्रारंभ में सरस्वती वंदना की वरिष्ठ कवयित्री डॉ शशि तिवारी ने। संस्था का परिचय वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजेंद्र मिलन ने दिया एवं सभी का

सप्ताहांत: आओ! हम बनाएं, सकारात्मक वातावरण

लॉकडाउन में घरों में बंद रहने के कारण और कोरोना से संबंधित दुःखद खबरें देख-पढ़ कर ज्यादातर लोग अवसादग्रस्त हो रहे हैं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन की शिकायतें आ रही हैं। ऐसी दशा में कुछ लोग आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं और अपने पूरे परिवार को तबाह कर लेते हैं। यह सब सकारात्मक वातावरण के अभाव में हो रहा है। यदि हम सकारात्मक वातावरण में रहें और सकारात्मक वातावरण न होने

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