सर्वज्ञ शेखर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान से विभूषित

आगरा। गाजियबाद में 27 वें अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के अवसर पर भारत सरकार,मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,भारत ( नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया) ने 13 अक्तूबर 2019 को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में आगरा के साहित्यकार सर्वज्ञ शेखर को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। गोष्ठी में सर्वज्ञ शेखर ने “स्वातंत्र्योत्तर हिंदी साहित्य में राष्ट्र चेतना” विषय पर अपने विचार प्रकट

हिंदी दिवस: वाद-विवाद प्रतियोगिता – सरस्वती विद्या मंदिर, कमला नगर, आगरा

हिंदी दिवस के अवसर पर सरस्वती विद्या मंदिर, कमला नगर आगरा में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में मुझे मुख्य अतिथि व निर्णायक मण्डल के सदस्य के रूप में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। विद्यालय के प्रबंधक श्री विजय गोयल जी का एतदर्थ आभार। प्रतियोगिता के विषय सामयिक व ज्वलन्त थे। मोबाइल, सोशल मीडिया, राजभाषा हिंदी, home work, peer pressure, जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने प्रभावी अभिव्यक्ति दी। लगभग एक हज़ार

क्या हिंदी दिवस मनाना एक विडम्बना है?

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पँक्तियों के अनुरूप निज भाषा के प्रचार प्रसार व संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हमारा देश हिंदी दिवस का आयोजन करता है। इस अवसर पर सरकारी कार्यालयों, बैंकों, प्रतिष्ठानों

हिंदी

राष्ट्र प्रेम, राष्ट्र सद्भावराष्ट्रीय अस्मिता है हिंदी,एक राष्ट्र एक भाषा कीप्रतीक कविता है हिंदी।माँ भारती के भाल परससम्मान सुशोभित सीसाहित्य के आकाश परप्रकाशित सविता है हिंदी। – सर्वज्ञ शेखरकवि, आगरा Hindi Rashtra prem, rashtr sadbhav,Rashtreey asmita hai Hindi,Ek Rashtr ek bhasha ki,Pratik kavita hai Hindi.Maan bharati ke bhal par,Sasamman sushobhit si,Sahitya ke aakash par,Prakashit Savita hai Hindi. – Sarwagya Shekhar, Poet, Agra

बधाई या शुभकामना?

क्या अंतर है दोनों में? शुभकामनाओं और बधाई में लोगों को प्रायः कन्फ्यूजन रहता है। मेरा एक बार बाहर से आगरा स्थानांतरण हुआ। जिस शाखा में स्थानांतरण हुआ वह बहुत खराब थी। एक मित्र बोले “तुम्हें शुभकामनाएं दूं या बधाई”। अपने शहर आये हो इसकी बधाई, लेकिन शाखा में तुम चल पाओगे या नही, इसके लिये शुभकामनाएं। यह वार्तालाप बधाई और शुभकामना का अंतर स्पष्ट कर देता है। जब कोई