सप्ताहांत: बुरा जरूर मानो, होली है

“बुरा न मानो होली है” का उद्घोष कब शुरू हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। पर होली पर बुरा न मानो की बात दशकों से कही जा रही है। प्राचीन काल में मनोरंजन के साधन कम थे। विभिन्न पर्व, त्योहार आध्यात्मिक संस्कारों के प्रतीक तो होते ही थे, आमोद-प्रमोद, हास-परिहास का भी माध्यम होते थे। होली का पर्व ऐसा ही है जब बुरा न मानो के नाम पर हुल्लड़बाजी,

सप्ताहांत: हर्ष फायरिंग का विषाद

आगरा के एत्मादपुर में हाल ही में एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग की घटना सामने आने से यह सिद्ध हो गया है कि कानून बन जाने के बावजूद इस प्रकार की घटनाएँ रुक नहीं रही हैं। नाम तो है हर्ष फायरिंग लेकिन हर्ष को विषाद और खुशी को मातम में बदल देने वाली हर्ष फायरिंग कड़े कानून और अकाल मौतों की घटनाओं के बावजूद कम होने का नाम नहीं

सप्ताहांत: कम से कम वित्तमंत्री को चिंता तो हुई

पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों से जनता में बढ़ते रोष ने लगता है सरकार को भी अब कुछ सोचने को विवश कर दिया है। सरकार की चिंता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बयान से परिलक्षित होती है जो उन्होंने शनिवार 20 फरवरी को चेन्नई में दिया। उन्होंने कहा कि ये एक अफसोसजनक व गंभीर मुद्दा है जिसमें कीमतें कम करने के अलावा कोई भी जवाब किसी को संतुष्ट नहीं

गणतंत्र पर भीड़तंत्र का शर्मनाक कृत्य

2021 का गणतंत्र दिवस मस्तक उन्नत करने की बजाए सर को शर्म से झुकाने के लिए भारी मन से याद किया जाएगा। 26 जनवरी को दिल्ली में विशेषकर लालकिले पर जो दुर्भाग्यशाली घटनाएँ हुईं वह शर्मसार करने वाली हैं, प्रत्येक देशभक्त का खून खौलाने वाली हैं।अभी तक विश्वास नहीं हो पा रहाकि कोई भारतीय ऐसा भी कर सकता है। भारत की आन बान शान की पहचान लालकिले पर अशोभनीय ढंग

बीमार भारत को वैक्सीन देने वाला बजट

कोरोना महामारी ने भारत के नागरिकों को ही नहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बीमार कर दिया है। 01 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट 2021 रोगियों व बीमार अर्थव्यवस्था को योजनाओं की वैक्सीन से निरोगी करने की दशा में किया जाने वाला प्रयास है। कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिए लगाए गए ‘लॉकडाउन’ के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था में 23.9

“हम भारत के लोग”

हम भारत के लोग, वैसे तो एक बहुत ही साधारण वाक्य है लेकिन जब इस वाक्य को भारत के संविधान की प्रस्तावना के साथ पढ़ा जाता है तो छाती गर्व से फूल जाती है, मस्तक गर्व से उन्नत हो जाता है। 26 नवंबर 1949 को स्वीकृत व आज ही के दिन 1950 से लागू हमारे संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है – हम भारत के लोग, भारत को एक

हर्ष फायरिंग: एक सामंती कुप्रथा

नाम तो है हर्ष फायरिंग लेकिन हर्ष को विषाद और खुशी को मातम में बदल देने वाली हर्ष फायरिंग कड़े कानून और अकाल मौतों की घटनाओं के बावजूद कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं डांसर तो कहीं बेंडवालों, कहीं बारात देख रहे बच्चों और महिलाओं तो कहीं दूल्हा दुल्हन या उनके रिश्तेदारों को ही गोली लग जाती है। लोग घायल हो जाते हैं या मौत के मुँह

निर्दोषों को सजा का अमानवीय पहलू

पिछले सप्ताह आगरा के अपर जिला जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने पांच वर्षों से जेल में बंद बाह क्षेत्र के जरार निवासी दंपती को मासूम की हत्या के मामले में बेगुनाह पाते हुए रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस ने इन्हें जेल भिजवा दिया था, जबकि हत्या किसी और ने की थी। अदालत का यह भी आदेश है कि जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और फिर से जांच कर

सप्ताहांत: स्वदेशी सफलता का गौरवशाली दिन – 16 जनवरी

16 जनवरी से कोरोना की वैक्सीन लगाने के अभियान प्रारंभ हो गया है। आइए, हम सब इस स्वदेशी सफलता पर गर्व करें और सहर्ष इसका हिस्सा बनें। यह ऐसा ऐतिहासिक दिन है जब विश्व में भारत का मस्तक एक बार फिर उन्नत हुआ है। यह कोरोना महामारी के अंत की शुरूआत है। वैक्सीन बनने की वैज्ञानिक प्रक्रिया, इसके प्रभाव, आम जनता तक इसकी पहुँच की अवधि आदि की जानकारी भले

क्या कहता है गुपकार का उभार?

कश्मीर में गुपकार के उभार ने एक खतरनाक संकेत दिया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यहां पहली बार डीडीसी चुनाव हुए। आठ चरण में 280 सीटों पर 51.42 प्रतिशत मतदान हुआ। इनमें विशेषकर कश्मीर में गुपकार ने जो मजबूती दिखाई है उससे सिद्ध होता है कि भाजपा की रणनीति विफल हो गई। डीडीसी चुनाव की घोषणा से पूर्व कश्मीर के ज्यादातर नेता जेल में थे। जेल

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