हरि बोल, हरि, हरि हरि बोल

नारी शक्ति का पूज्य उपासकबेटियों का है रखता मान।नदियों को भी माँ मानतादेवियों का करता गुणगान।।माँ भारती को नमन करताराष्ट्रभाषा का करता सम्मान।हिंदी बिंदी भारत माँ कीऐसी संस्कृति का देता ज्ञान।।वीर शहीदों के रक्त से सिंचितआजादी का पुष्पित उद्यान।राष्ट्रवीरों को नमन करतामेरा प्यारा हिंदुस्तान।।सीमा पर खड़े हैं सैनिकबहादुरी से सीना खोल,हरि बोल, हरि, हरि हरि बोल। राष्ट्रद्रोही कुछ सक्रिय हो रहेरहना उनसे सावधान।संस्कृति, धर्म की रक्षा करनाहो अपना कर्तव्य महान।।व्यभिचारी,

संस्थान संगम की ऑनलाइन काव्यगोष्ठी

कोरोना के योद्धाओं को नमन, अभिनंदन,मजदूरों की दशा पर चिंता आगरा। साहित्यिक संस्था संस्थान संगम के तत्वावधान में ऑनलाइन ऑडियो कविगोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कोटा के वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने की। मुख्य अतिथि थे दिल्ली के कर्नल प्रवीण त्रिपाठी। गोष्ठी में अमेरिका से डॉ शशि गुप्ता सहित बैंगलोर, कोटा, ग्वालियर, दिल्ली, मेरठ, भोपाल, आगरा के 50 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। गोष्ठी का

साधु-संतों की रक्षा करो सज्जनों को न दो संताप

संतों की निर्मम हत्या सेशोकमग्न है देश हमारा।नर नहीं नरपिशाच हैं वोसाधुओं को जिन्होंने मारा।हत्यारे और संरक्षक उनकेपाएँ सजा कठोर सभी,पुनरावृत्ति होने न पाएऐसी घटना की फिर कभी। अफवाहों को न फैलाओऔर न भरोसा करो उन पर,उत्तेजित, आक्रोशित न होनाइधर-उधर की बातें सुन कर।भीड़ हिंसा अपराध जघन्य हैनिरपराध की हत्या है पाप,साधु-संतों की रक्षा करोसज्जनों को न दो संताप। – सर्वज्ञ शेखर

संपूर्ण देश करबद्ध आपका करता है सादर अभिनंदन

लॉकडाउन का करो पालनसतर्क रहो और सावधान,राष्ट्ररक्षकों का भी करना हैहम सब को पूरा सम्मान।हे राष्ट्ररक्षको राष्ट्रवीरो!आपकी कर्तव्यनिष्ठा को नमन,आप सजग हो, आप जागृत होतभी सुरक्षित है जन-जन।कोरोना के विरुद्ध युद्ध मेंसबसे आगे आप खड़े होसंपूर्ण देश करबद्ध आपकाकरता है सादर अभिनंदन।कोरोना का असर है जब तकघूमो न फिरो स्वच्छंद,नमस्ते करो करबद्ध हो करहाथ मिलाना कर दो बंद।मेड इन चाइना बीमारी हैज्यादा नहीं चलेगी,गले मिलना छोड़ दो तोगले नहीं पड़ेगी।सही

पंद्रह अप्रैल का सूर्य उगेगा नव उमंग-उत्साह लिए

कोरोना कोरोना कोरोनासारे दिन बस एक ही रोना,छोड़ो भी बस बहुत हो गयाअब कोई और बात करो ना। ताली-थाली-दिया टोटकोंसे भी नहीं बन रहा काम,घर के अंदर बंद रह करभज रहे बस प्रभु का नाम। कर्मशील, कर्मठ भारतवासीनाकारा रह सकते नहीं,पर लौकडाउन के नियमों सेचाह कर भी बच सकते नहीं। पंद्रह अप्रैल का सूर्य उगेगानव उमंग-उत्साह लिए,एक-एक दिन यूँ ही कट रहाजैसे आजादी की चाह लिए। भाग कोरोना भाग जल्दीबहुत

अंतर्मन का दीप जलाओ

अंतर्मन के दीप जला करअज्ञानता का तम हरो,कोरोना से बचने को मित्रोनिर्देशों का मान करो।कोविड के जीवाणु काअंत करेगा बस विज्ञान,सामाजिक दूरी रखने परही बस देना अपना ध्यान।दीप जलाओ मानवता काभूखों को कुछ दे दो अन्न,सहायता का दीप जला करमजदूरों को करो प्रसन्न।दीप जलाओ अदब तहजीब काचिकित्सकों का करो सम्मान,दीप जलाओ अनुशासन काकरो न किसी का भी अपमान।दीप जला कर गोदामों मेंरोको कालाबाजारी को,बेईमानी करने से रोकोदीप दिखाओ व्यापारी को।कोरोना

प्रकृति से करो प्रेम प्रिये।

प्रकृति है दाता प्रकृति है भरता, प्रकृति है प्रभु का अनुपम उपहार प्रिये, प्रकृति से करो प्रेम प्रिये। जीवन में आशा प्रेम में भाषा, ऊर्जा, ऊष्मा उत्साह, उमंग प्रकृति ने संचार किए, प्रकृति से करो प्रेम प्रिये। चिड़ियों की चहक पुष्पों की महक, वन-उपवन शीतल मंद पवन, सुरभित पुष्पित गुलज़ार चमन, प्रकृति का है विहार प्रिये, प्रकृति से करो प्रेम प्रिये। प्रकृति की साधना करो आराधना, प्रकृति जब खिलखिलाती चहुँ

जिसकी अंटी में पैसा है उसकी होली है

आज देश के विख्यात व आगरा नगर के लब्धप्रतिष्ठ कवियों व शायरों के साथ मंच साझा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अवसर था भारतीय नाट्य कला मंच द्वारा नागरी प्रचारिणी के मानस भवन में आयोजित होली मिलन समारोह व काव्य गोष्ठी का। कार्यक्रम की अध्यक्षता की वरिष्ठ ग़ज़लकार, साहित्यकार डॉ त्रिमोहन तरल ने। मुख्य अतिथि थे प्रो. सोम ठाकुर। डॉ शशि तिवारी, अशोक रावत, राजकुमार रंजन, राजबहादुर राज, शिवशंकर शर्मा,

ताज की धवल छवि

दिवस का अवसान समीप था।गगन था कुछ लोहित हो चला।तरु-शिखा पर थी अब राजती।कमलिनी-कुल-वल्लभ की प्रभा॥ सुप्रसिद्ध साहित्य मनीषी हरिऔध जी ने यद्यपि यह पँक्तियाँ ताजमहल को लक्ष्य करके नहीं लिखीं थीं परँतु सूर्यास्त का अलौकिक वर्णन जिस प्रकार किया गया है उसके आलोक में ताज की धवल छवि का आजकल जिक्र अवश्य हो रहा है। शाम के साढ़े पाँच बजे जब दिवस का अवसान होता है, आसमान रक्ताभ लालिमा