सप्ताहांत: गरीब की थाली – छेद वाली

थाली एक बार फिर चर्चा में है। और इस बार थाली की चर्चा हो रही है, “जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करने” की उक्ति को लेकर। “जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करने” का तात्पर्य है कृतघ्नता, एहसान फरामोशी। अर्थात जिसने आपके साथ अच्छा किया, उसी के साथ बुरा बर्ताव करना। यह तो अब एक सामान्य सी बात हो गई है। आजकल जहाँ सामाजिक व

क्या हिंदी दिवस मनाना एक विडम्बना है?

सर्वप्रथम आप सभी को हिंदी दिवस की बधाई! निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता भारतेंदु हरिश्चंद्र की इन पँक्तियों के अनुरूप निज भाषा के प्रचार प्रसार व संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हमारा देश हिंदी दिवस का आयोजन करता

सप्ताहांत: मेरे गुरु जी

जिस समय मैं यह पंक्तियाँ लिख रहा हूँ, आज शिक्षक दिवस है। तथापि इस आलेख के प्रकाशित होने तक शिक्षक दिवस निकल चुका होगा। मैं इस पुनीत अवसर पर अपने प्राइमरी शिक्षक जिन्होंने सबसे पहले मेरे को एक प्राइमरी विद्यालय में शिक्षा दी, वह छोटे से विद्यालय के प्रधानाचार्य थे, आदरणीय चंदन लाल गुप्ता जी को याद करना चाहता हूँ। उन्होंने ही मेरे जीवन की शैक्षिक आधारशिला रखी जो कि

सप्ताहांत: सतर्कता ही एकमात्र रास्ता है

कोरोना के विरुद्ध युद्व अभी जारी है। देश में अब बहुत कुछ अनलॉक हो चुका है। कुछ अपवादों को छोड़कर लॉकडाउन का भारत की जनता ने समझदारी से व दृढ़ता से पालन किया। इसी लिए हमारे देश में अन्य देशों की अपेक्षा इस महामारी का प्रसार कम हो पाया। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कुल मरीज़ों की संख्या 3461240 थी। कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 62173 है।

सप्ताहांत: धोनी – फिनिशर अभी फिनिश नहीं हुआ

पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने हाल में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इंटरनैशनल क्रिकेट से अचानक रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया। प्रशंसक हैरान थे और उदास दिल से अपने हीरो को भविष्य के लिए शुभकामना दी। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने खास पत्र लिखा और अपने लंबे पत्र में उन्होंने धोनी के हर एक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं

सप्ताहांत: मनोज सिन्हा जी से मेरी पहली मुलाकात

2019 के लोकसभा चुनाव में यदि मैंने किसी प्रत्याशी के परिणाम पर सबसे ज्यादा निगाह रखी थी तो वह थे तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा। लेकिन जब परिणाम आया तो मुझे आश्चर्य मिश्रित दुख हुआ। गाजीपुर संसदीय सीट से वह भारी मतों से पराजित हुए थे। मोदी सरकार के 9 मंत्रियों में से वह अकेले ही थे जिन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस समय मेरा त्वरित ऑब्जरवेशन यही था

हर हादसे के बाद…

यद्यपि यह सही है कि आतंकवादी घटनाओं को छोड़कर कोई भी हादसा कोई जानबूझकर नहीं करता। लेकिन यह बात भी विचारणीय है कि हादसा हो जाने के बाद जो कमियां तुरंत सामने आती हैं, उन कमियों पर पहले क्यों नहीं ध्यान दिया जाता। जी हाँ, मेरा इशारा 7 अगस्त को केरल के कोझिकोड में हुई विमान दुर्घटना की ओर ही है। सीमा पर वीरों की शहादत के बाद “वीरों की

सप्ताहांत: क्या आपको पता है कि आप को सब कुछ पता है?

मैं आज अपनी बात शुरू करुँ, उससे पूर्व मैं सभी सुधी पाठकों, शुभचिंतकों व अपने उन मित्रों का आभार प्रकट करना चाहता हूँ जो सप्ताहांत पढ़ने के उपरांत मुझे फोन करके या मेरे व्हाट्सएप पर या मेरे फेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और उत्साहवर्धन करते हैं। मैं ज्यादा कहूंगा तो आत्मप्रशंसा ही माना जाएगा। बस इतना अवश्य कहना चाहता हूँ कि बहुत लोग सप्ताहांत की प्रतीक्षा करते हैं, ऐसा

कभी कभी ऐसा भी हो जाता है

एक बड़े बाबा देश के एक नामी चैनल पर आज सुबह डायबिटीज कम करने का लाइव सेशन चला रहे थे और दावा कर रहे थे कि आधे घंटे में डायबिटीज कम हो जाएगी। इसके लिए उन्होंने पहले अपनी और अपने 2 शिष्यों की डायबिटीज चेक की। उनकी 96 उनकी शिष्या की 178 व शिष्य की 297 रही। आधा घंटे के योग कार्यक्रम के बाद जब डायबिटीज चेक की गई तो

सप्ताहांत: ऐसे कैसे काम चलेगा यूपी में

उत्तर प्रदेश में आपराधिक घटनाओं का ग्राफ बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। कुछ घटनाओं में पुलिस की संलिप्तता से उत्तर प्रदेश प्रशासन, शासन व पुलिस की छवि निश्चित रूप से धूमिल हुई है। कानपुर में एक व्यक्ति के अपहरण और उसकी रिहाई में 30 लाख की फिरौती का जो कांड हुआ उसने भी पुलिस व अपराधियों के नापाक गठजोड़ की ओर वैसे ही इंगित किया है जैसा बिकरू में

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