सप्ताहांत: मनोज सिन्हा जी से मेरी पहली मुलाकात

manoj sinha
Image Courtesy: Wikipedia

2019 के लोकसभा चुनाव में यदि मैंने किसी प्रत्याशी के परिणाम पर सबसे ज्यादा निगाह रखी थी तो वह थे तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा। लेकिन जब परिणाम आया तो मुझे आश्चर्य मिश्रित दुख हुआ। गाजीपुर संसदीय सीट से वह भारी मतों से पराजित हुए थे। मोदी सरकार के 9 मंत्रियों में से वह अकेले ही थे जिन्हें हार का सामना करना पड़ा। उस समय मेरा त्वरित ऑब्जरवेशन यही था कि वह इतना आगे बढ़ चुके थे कि भितरघात करके उनको हर वाया गया या उन्होंने अपने को जिताने के लिए किसी सीमा से अधिक जाकर कोई अतिक्रमण या या छल प्रपंच नहीं किया।

मनोज सिन्हा जी से मेरा दूर-दूर तक कोई सामाजिक, राजनीतिक, परिवारिक या किसी तरह का कोई संबंध दूर-दूर तक नहीं है। फिर भी मैं उन को जीतता हुआ क्यों देखना चाहता था, उसके पीछे एक बड़ा कारण था। उनसे अचानक हुई पहली मुलाकात में ही मैं उनसे बहुत प्रभावित हुआ था। वह बड़े नेता हैं उनके कितने फैन हैं उन्हें नहीं मालूम। लेकिन जो फैन होता है उसे सब मालूम होता है। एक ही दिन में मैंने उनकी प्रशासनिक सख्ती, समयबद्धता, सहजता मितभाषिता, व उदार दिल को पहचान लिया था जिससे मैं बहुत प्रभावित था। यही कारण है कि मनोज सिन्हा जी को जम्मू का उपराज्यपाल बनाए जाने पर मुझे बहुत खुशी हुई।

Manoj Sinha with Sarwagya Shekhar

2 नवंबर 2018 को आगरा में एमएसएमई पर एक बहुत बड़ा सरकारी कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह एक बहुत बड़ा व महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम था। जिला प्रशासन व वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस वी वी आई पी कार्यक्रम में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा, उ प्र के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा, भारत सरकार वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आगरा के मेयर, सांसद, विधायक, लीड बैंक केनरा बैंक के वरिष्ठ कार्यपालक, प्रसाशनिक अधिकारी आदि उपस्थित थे। चार घण्टे तक चले इस विशाल कार्यक्रम में पांच हज़ार से अधिक उद्यमियों व आम जनता ने भाग लिया।

कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विज्ञान भवन दिल्ली से सीधे आगरा वासियों व देश की जनता को संबोधित किया।

इस विशिष्ट कार्यक्रम के #मंच #संचालन हेतु अधिकारियों ने मेरा चयन किया था और इस गुरुतर दायित्व का मैंने सफलतापूर्वक निर्वहन किया। सच्चाई यह थी कि इतने विशिष्ट और बड़े कार्यक्रम के लिए अधिकारियों को एक परिपक्व मंच संचालक ढूंढना मुश्किल हो रहा था और किसी ने जब मेरा नाम प्रस्तावित किया तो मैंने बिना किसी हिचक और भय के उसे स्वीकार कर लिया। कार्यक्रम दो बजे शुरू होना था और ठीक दो बजे केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में मनोज सिन्हा जी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित थे। यह देखकर मैं सन्न रह गया, क्योंकि कार्यक्रम में आने वाले और वीवीआईपी अभी तक नहीं आए थे। आते ही मनोज सिन्हा जी ने घड़ी देखी, मुझे बुलाया और बोले कार्यक्रम शुरू करो। मैंने कहा, सर, अभी और कुछ लोग आने हैं। पर वह बोले नहीं कार्यक्रम समय पर शुरू करो। मैंने स्थानीय अधिकारियों से कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति मांगी तो वह थोड़े हिचके क्योंकि जो अन्य मुख्य अतिथि आने थे वह उत्तर प्रदेश से थे और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व अन्य सांसदों विधायकों के आए बिना कार्यक्रम शुरू होना स्थानीय अधिकारियों को बड़ा असहज लग रहा था। मुझे सिन्हा जी से कुछ भय भी लगा पर मैंने किसी तरह से स्थिति को नियंत्रण किया व कार्यक्रम बहुत अच्छी तरह चला। कार्यक्रम समाप्त होने पर जब मनोज सिन्हा जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर “वेल-डन मिस्टर शेखर” कहा, तब मुझे लगा कि वह ऊपर से तो सख्त हैं लेकिन उनके दिल में बहुत उदारता है और वह हर किसी की बात को महसूस करते हैं परिस्थिति को समझते हैं।

– सर्वज्ञ शेखर

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