सप्ताहांत: बहुत फायदे है खुद काम करने के

home cleaning in covid lockdown

“हाय राम! जरा देखना कितना कूड़ा है दीवान के नीचे, बाई को कितनी बार बोला है जरा झाडू से अंदर तक सफाई किया कर, पर सुनती ही नहीं है। इधर उधर दो चार हाथ मारे, बस हो गया काम। धीरे-धीरे ही सही, आज खुद मैं ही कर लेती हूँ पूरे घर की सफाई।”

लॉकडाउन के दौरान जब बाई को छुट्टी दे दी, यह उस दिन का वाकया है। और अब तो कम से कम 03 मई तक बाई नहीं आई तो रोज ही ऐसा होगा।

वैसे महीने में कम से कम कुछ दिन तो अपने हाथ से सफाई करनी ही चाहिए उससे मन को भी बडी तसल्ली मिलती है। कभी-कभी ऐसी रखी हुई चीज मिल जाती है जिसे बहुत दिन से ढूढ़ रहे थे तो कुछ ऐसा सामान सामने आ जाता है जो बाजार से लाने की सोच रहे थे या उसकी तारीख एक्सपायर होने वाली थी। जब पत्नी मायके चली जाए और पतिदेव को घर पर कुछ दिनों के लिए खुद काम करना पड़े तो मसालदानी, चीनी, चाय की पत्ती के बर्तनों में जब छिपे हुए नोट मिलते हैं या बच्चों की अलमारी में गड़बड़ मसाला मिलता है तो आँखें फटी रह जाती हैं।

शासन-प्रशासन में भी ऐसा ही होता है। मैं तो बैंक से अवकाश प्राप्त कार्यपालक हूँ। मुझे भी यह अच्छा लगता था कि जो काम अधीनस्थ करते हैं वह माह में कम से कम मैं एक बार अपने हाथ से करूँ। ऐसा करने में कई बार बैंक में ऐसी पेंडिंग पड़ी धनराशि मिल गई जो गरीब विधवाओं की पेंशन थी या छात्रवृत्ति थी जो किसी छोटे तकनीकी कारणों से उनके खाते में नहीं पहुंची। बैंकों में या अन्य कार्यालयों में जॉब रोटेशन व स्थानान्तरण इसी प्रक्रिया का एक अंग है कि एक काम को एक ही व्यक्ति ज्यादा दिन तक नहीं करे। अनेक बार ऐसा हुआ कि जब स्थानांतरित होने या जॉब रोटेशन के उपरांत दूसरा व्यक्ति उस सीट पर आया तो पता लगा कि पहला कर्मचारी या अधिकारी धन का गबन या फ्रॉड कर रहा है या उसने अपने कुछ खास लोगों को फायदा पहुँचाया है। जब तक लोग सीट पर रहते हैं अपने द्वारा की जा रही अनियमितता को येन-केन-प्रकारेण छिपाते रहते हैं। इसी लिए यदि स्थानांतरण न भी हो तो कम से कम उनकी सीट बदल दी जाती है। जो कर्मचारी या अधिकारी बिलकुल छुट्टी नहीं लेते या बहुत कम लेते हैं, उन पर भी ज्यादा नज़र रखी जाती है और उन्हें जबरन अवकाश पर भेजा जाता है।

तो आइए, आप भी संकल्प लीजिए कि चाहे घर में हों या कार्यालय में, चाहे आपकी कोई दुकान हो, माह में एक दिन या दो दिन अचानक स्वयं काम करें।

और हाँ, 03 मई तक घर में ही रहें, घर में ही रहें और घर में ही रहें।

– सर्वज्ञ शेखर

There are Many Advantages of Working on your Own

“Oh My God! Just look at how much garbage is under the diwan, how many times has Bai spoken to me, sweep from sweep to inside, but he does not listen. Two or four hands were killed here and there, the work was done. Slowly, today I myself do the entire house cleaning. “

This is the incident of the day when Bai was discharged during the lockdown. And now at least till May 03, if not by then, it will happen daily.

By the way, at least a few days in the month, you should clean with your own hands, it also gives a lot of comfort to the mind. Sometimes such a thing is found which has been searching for a long time, then something comes out that was thinking of bringing it from the market or its date was about to expire. When the wife goes to her maternal home and husband has to work for a few days at home, the eyes are cracked when there are hidden notes in masaladani, sugar, tea leaf pots or there is a messy spice in the children’s cupboards.

The same thing happens in governance. I am a retired bank executive. I also liked that the subordinate work I do at least once a month with my hand. In doing so many times the bank got such pending funds which were pension of poor widows or scholarships which did not reach their account due to some small technical reasons. Job rotation and transfer in banks or other offices is a part of this process that not a single person should do a job for a long time. Many times it happened that when the second person came to the seat after transferring or job rotation, it was found that the first employee or officer was embezzling or fraudulent money or he had benefited some of his special people. As long as people stay in the seat, they keep hiding the irregularities they are doing. That is why even if there is no transfer, at least their seat is changed. Employees or officers who do not take any leave at all or take very little are also monitored more and are forcibly sent on leave.

So come, you also take a pledge that whether at home or in office, whether you have a shop, work on your own suddenly one day or two days in a month.

And yes, till May 03 stay at home, stay at home and stay at home.

– Sarwagya Shekhar

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