सप्ताहांत: माँ के आँचल में सुख स्वर्ग सा, माँ के चरणों में चारों धाम

mothers day

बात उन दिनों की है जब मैं बैंक में था। हमारे एक महाप्रबंधक महोदय दौरे पर आए और उन्होंने अपने उद्बोधन के अंत में सभी से एक प्रश्न किया, “पति पत्नी ने आपस में या महिला पुरुष मित्रों ने एक दूसरे को अनेक बार आई लव यू बोला होगा, परंतु यह बताइए कि आप में से कितने लोगों ने अपनी माँ को आई लव यू बोला है?” उनके इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था, सभी बगलें झाँकने लगे। किसी ने बड़ी हिम्मत करके उत्तर दिया, “सर, माँ से ‘आई लव यू’ कैसे कह सकते हैं।” महाप्रबंधक महोदय ने फिर विस्तार से अपनी बात को समझाया। विवाह के समय स्टेज पर खुलेआम लड़का लड़की के सामने घुटने के बल बैठ कर अपने प्रेम का इज़हार करता है। लेकिन अपनी माँ के चरणों मे बैठने में शर्म आती है। माँ को अपने बच्चों से किसी प्रशंसा, प्यार या श्रद्धा की दरकार नहीं है।परंतु कभी कभी माँ के चरणों में बैठो, उनकी गोद में अपना सर रखो और कहो, माँ मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ, माँ मैं जो कुछ भी हूँ आपकी वजह से ही हूँ। फिर देखो माँ के नयनों से निकलने वाली गंगा-जमुना की धारा आपको स्नेह से भिगो देगी, संसार की सारी खुशियों से आपकी झोली भरने की प्रार्थना ईश्वर से करेंगी।

आज मातृ दिवस पर यह महाप्रबंधक महोदय का पुराना उद्बोधन याद आ गया।पूरे विश्व में हर वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मनाया जाता है। बच्चे अपनी माँ को सम्मान स्वरूप उपहार देते हैं, कहीं और रहती हैं तो उनसे मिलने जाते हैं, ज्यादा दूर हैं तो उनको ऑनलाइन उपहार भेजते हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उनके दर्शन करते हैं। जिनकी माँ इस संसार में ही नहीं हैं, वह भी उनके चित्र को माल्यार्पण करके श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

मातृ दिवस भारत में ही नहीं पूरे विश्व में मदर्स डे के नाम से मनाया जाता है। इस की तिथि को लेकर दुनियाभर में हमेशा ही मतभेद रहा है। मदर्स डे बोलीविया में 27 मई को मनाया जाता है। क्योंकि 27 मई, 1812 की क्रांति में स्पेन की सेना ने आजादी के लिए लड़ रही बॉलीविन महिलाओं की नृसंश हत्या कर दी थी, उन महिलाओं के सम्मान में 27 मई को ‘मदर्स डे’ मनाया जाता है। वहीं, ग्रीस के लोग अपनी मां के प्रति स्नेह और सम्मान के लिए इस पर्व को हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मनाते हैं। भारत में भी इसी तिथि को मदर्स डे मनाया जाने लगा। मदर्स डे की एक और कहानी यह भी है कि मदर्स डे की शुरूआत 1912 में अमेरिका से हुई। एना जार्विस नाम की अमेरिकी कार्यकर्ता अपनी मां से बेहद प्यार करती थी, उन्होंने कभी शादी नहीं की। मां की मौत होने के बाद प्यार जताने के लिए उन्होंने इस दिन की शुरुआत की। जिसे बाद में 10 मई को पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा।

हमारे भारत में तो हर रोज ही मातृ दिवस है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में लिखा है-

प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥

अभी भी पुराने परिवारों में प्रातःकाल उठकर सर्वप्रथम माता-पिता के चरणस्पर्श करने, विद्यालय या कार्यालय आते-जाते समय माता-पिता का अभिवादन करने की परंपरा जारी है। भारत में माँ को दुर्गा, शक्ति माना गया है और देवी स्वरूप में माँ की प्रतिदिन पूजा की जाती है। हमारे यहाँ तो धरा, राष्ट्र, शिक्षिका, गाय व पवित्र नदियों तक को माँ माना गया है और उसी प्रकार उनको प्रतिदिन पूजा जाता है। फिर भी किसी दिवस विशेष को मना कर सारे संसार की उन भूली बिसरी माँओं को याद करना अच्छा लगता है जिन्होंने अपने बच्चों के जीवन की रक्षा करते हुए अपनी जान की बाज़ी लगा दी।

आइए! हम सब मिलकर संपूर्ण मातृ शक्ति को नमन करें।

माँ के आँचल में सुख स्वर्ग सा
माँ के चरणों में सारे धाम,
मातृ दिवस पर पूज्य माँ को
सादर हमारा करबद्ध प्रणाम।
माँ तुम दुर्गा, माँ तुम शक्ति
वात्सल्य रस की अनुपम खान,
सुख की वर्षा सदैव करती
इस धरा की हो तुम भगवान।

– सर्वज्ञ शेखर

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