नवरात्र में मंदिर न जाएं: जानिए घर पर रह कर कैसे करनी है पूजा

कल 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। ऐसे में माता के भक्त पूरे 9 दिनों तक माता की पूजा-अर्चना करके मां को प्रसन्न करते हैं। इस बार कोरोना के कारण लोकडाउन की वजह से मंदिर न जाएं व घर पर रह कर ही पूजन करें।

कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए सबसे ज्यादा जोर भीड़भाड़ से बचने पर है। चैत्र नवरात्रि में मंदिरों में जुटने वाली दर्शनार्थियों की भीड़ से आशंकित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सुझाव दिया है कि इन हालात में मंदिर न जाएं, बल्कि घर में ही अनुष्ठान करें। साथ ही सभी धर्मगुरुओं से अपील की है कि जनता को धर्मस्थलों में भीड़ न लगाने के लिए समझाएं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चैत्र नवरात्रि निकट है। नवरात्रि के पहले, दूसरे दिन और अष्टमी-नवमी पर लोग विशेष रूप से मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए जाते हैं। इस दौरान अनेक स्थानों पर मेले आदि भी आयोजित किए जाते हैं। विशेष परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने आमजन से अनुरोध किया है कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अपने घर में ही रहकर धार्मिक अनुष्ठान करें। इससे इस संक्रामक बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।

हम आपको बताते हैं घर पर र्च कर 9 दिन तक कैसे पूजन करना है।

नवरात्र की 9 देवियां अलग-अलग 9 शक्तियों का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर आप भी इन नौ दिनों में माता को प्रसन्न करके अपनी हर मुराद झट से पूरी कर लेना चाहते हैं तो नवरात्रि में हर दिन के हिसाब से माता को लगाएं उनकी पसंद का भोग। आइए जानते हैं किस दिन किस माता को लगाया जाता है किस चीज का भोग।

1-मां शैलपुत्री-पहला दिन-
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। मां शैलपुत्री को आरोग्य की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति नवरात्रि के पहले दिन गाय के शुद्ध देसी घी का भोग माता को लगाता है तो मां शैलपुत्री की कृपा से व्यक्ति को निरोग और खुश रहने का वरदान मिलता है।
2- मां ब्रह्मचारिणी- दूसरा दिन-
जो लोग मां ब्रह्मचारिणी से अपने लिए दीर्घायु का वरदान चाहते हैं उन्हें नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से माना जाता है कि व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

3-मां चंद्रघंटा -तीसरा दिन-
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीज़ों का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन के हर दुख समाप्त जाते हैं।

4-मां कूष्मांडा-चौथा दिन-
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन ब्राह्मणों को मालपुए खिलाने चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

5-मां स्कंदमाता- पांचवां दिन-
नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। स्कंदमाता की पूजा करने से आजीवन आरोग्य रहने का वरदान मिलता है।

6-मां कात्यायनी-छठां दिन-
नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से आकर्षण का आशीर्वाद मिलता है।

7-मां कालरात्रि -सातवां दिन-
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजी की जाती है। इस दिन माता को गुड़ का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि गुड़ का भोग लगाने से आकस्मिक संकट से रक्षा होती है।

8-मां महागौरी- आठवां दिन-
नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन लोग कन्या पूजन भी करते हैं। इस दिन महागौरी की पूजा करते समय माता को नारियल का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।

9-मां सिद्धिदात्री- नौवां दिन-
नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन माता को तिल का भोग लगाते हैं। जिन लोगों को आकस्मिक मृत्यु का भय होता है वो मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं।

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